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Anna must define what is corruption -Acharya Dharmendra Ji !

In National on October 14, 2011 at 2:16 am

 

 

अन्ना हजारे चाहते हैं कि भ्रष्टाचारियों को फांसी दे दी जाए. तो यहाँ देश उनसे पूछना चाहता है कि भष्टाचारी कि परिभाषा क्या है? भ्रष्टाचारी केवल अगर रुपये पैसे का लेन देन करे, और करेंसी में रिश्वत ले तो भ्रष्टाचारी है? या जमीन के प्लाटों का भूखंडों की हेरा फेरी करने वाले भी भ्रष्टाचारी हैं ? ?? और अगर भूखंडों कि हेराफेरी करने वाला भी भ्रष्टाचारी है तो कश्मीर क्या है? पर्सनल प्रोपर्टी या किसी सरकार कि प्रोपर्टी या किसी सरकारी एजेंसी कि प्रोपर्टी की हेराफेरी करना जैसे आदर्श सोसाइटी में हुआ फ्लैटों की हेराफेरी करना मकानों की करना तो ये तो भ्रष्टाचार हो गया, और जो भारत का शीर्ष प्रदेश है. सबसे ऊपर वही है. उस पूरे के पूरे प्रदेश की हेराफेरी करने की जो बात करता है वो भ्रष्टाचार कैसे नहीं है? पर ये भ्रष्टाचार व्यक्ति से सम्बंधित नहीं है, राष्ट्र से सम्बंधित है,  और राष्ट्र के मामले में जिस व्यक्ति की ये राय हो, कि जबरदस्ती घुस कर बैठे हुए जो लुटेरे है, या जिनकी भारत में आस्था नहीं है, उन लोगो को जनमत संग्रह का अधिकार दिया जाए. नमकहरामों को जनमत संग्रह का, मत संग्रह का अधिकार, उनको उनकी इच्छा बताने का, वोटिंग का, आत्मनिर्णय का अधिकार  दिया जाए तथा भ्रष्टाचारी की जो परिभाषा है उसमे  अन्ना हजारे उन लोगों को काउंट करते हैं की नहीं करते हैं जो दहेज़ के लोभ में बहुओं को ऊपर से नीचे फेंक देते हैं, अभी  ये काण्ड हुआ है जयपुर में. और ऐसे होते रहते हैं. या फिर जो बेटे सब कुछ माता पिताओं का लेकर उनको धक्का मार कर बाहर फेंक देते हैं, वो भ्रष्टाचारी हैं कि नहीं हैं? तो प्रश्न ये कि इतना बड़ा भ्रष्टाचार दिखाई नहीं दे रहा है अन्ना को? वहां के जो असली स्वामी हैं पंडित उनको वहां से निकाल दिया गया है, और आज तक चालीस  चालीस वर्षों से पचास सालों से कोई पूरी की पूरी कम्युनिटी अपने  ही देश में शरणार्थी हो, इससे बड़ा भ्रष्टाचार टीम अन्ना बताये, अरविन्द केजरीवाल जो राष्ट्र के ठेकेदार बने हुए हैं, और अन्य टीम अन्ना देशभक्ती का नगाड़ा बजाने वाले लोग, इनको स्पष्ट करना चाहिए कि कश्मीर के बारे में इनकी क्या राय है? और पाकिस्तान के बारे में इनकी क्या राय है.?पाकिस्तान के बारे में बुद्धिजीवी क्या राय रखते हैं ? और कब्ज़ा कर के बैठ गया है चीन तिब्बत पर और अन्ना के जो महान बुद्धिजीवी सम्राट यानी बुद्धिजीवियों के जो सम्राट हैं , उनका इस बारे में क्या कहना है? ?? ब्रहमपुत्र छोड़ देना चाहिए न ? तिब्बत छोड़ देना चाहिए न ? इनपर किस का कब्ज़ा मानते हैं, टीम अन्ना को ये बताना चाहिए, कि तिब्बत पर किसका कब्ज़ा है, और कौन अधिकारी है?  कौन मालिक है? दलाई लामा को वो तिब्बत का स्वामी मानते हैं कि नहीं मानते हैं? और दलाई लामा को अगर वो तिब्बत का स्वामी मानते हैं तो फिर वो का वो केस तो कश्मीर में है. यहाँ अगर लुटेरा चीन जबरदस्ती जो तिब्बत पर बैठा हुआ है तो वहां का मालिक अगर स्वीकार कर लिया जाएगा. तो फिर भ्रष्टाचार कि परिभाषा, अंतर्राष्ट्रीय परिभाषा बदलनी पड़ेगी. तब तो जो व्यक्ति देशद्रोह का अपराधी है, उसको फांसी पर मत लटकाओ. कुछ देशभक्त युवकों को अगर सहन नहीं हुआ ये जो इन्दर वर्मा पकड़ा गया है, या जो उसके साथी और हैं, दो या तीन या चार या पांच. चाहे वो किसी भी सेना से हों या किसी भी क्रांतिकारी ग्रुप में सो काल्ड, तथाकथित से सम्बंधित हों,  लेकिन प्रशांत भूषण के साथ उनका कोई व्यक्तिगत झगडा, जमीन का, जायदाद का, दीवार खडी कर ली, झरोखा  निकाल लिया या खिड़की उधर खोल ली, या नाला गिर गया उनका? किस बात का झगडा ? ?? तो प्रशांत भूषण के परिवार  की कन्या के सम्बन्ध में कोई झगडा? तो क्या? इनको क्या परेशानी है? युवकों को ? ?? जिस उम्र में लड़के सीटियाँ बजाते हुए छोरियों के पीछे पीछे फिरते हैं, चेन खींचते फिरते हैं, बाइक उठाते फिरते हैं, आपराधिक गतिविधियों में रहते हैं, उस उम्र के लड़के यदि उनको इस बात से तकलीफ होती है कि कश्मीर के मामले में इस आदमी ने ऐसी बात क्यों कही? तो उनको तो अर्जुन पुरस्कार मिलना चाहिए ना? उनको तो भारत रत्न मिलना चाहिए ना? जो कम से कम इस देश में इस घनघोर  भयानक युग में, स्वार्थी युग में,कुछ इस प्रकार के युवक हैं. जिनके तन बदन में आग लग जाती है, जो देश के बारे में सोचते हैं. उन्होंने अपने मातापिता के बारे में, अपने भाई बहनों के बारे में या अपने परिवार के बारे में तो कोई झगडा नहीं किया ना? और जो आदमी सुप्रीम कोर्ट में चेंबर चलाता हो. और सुप्रीम कोर्ट का अपने आपको वकील मानता हो और देश का सबसे बड़ा अपने आपको कानूनविद मानता हो. अम्बेडकर जी के बाद डॉ कैलाशनाथ  काटजू, मोतीलाल नेहरु उनसे बड़ा बैरिस्टर ये आदमी है, और इस आदमी को इतनी जमीज नहीं है कि ये मैं क्या बोल रहा हूँ? किसने किसने ये अधिकार दिया तुम लोगों कि तुम लोगों ने तथाकथित भ्रष्टाचार के खिलाफ तथाकथित आन्दोलन खड़ा किया? तमाशा खड़ा कर दिया बारह दिन का और उस बारह दिन के तमाशे में तुमको ये अधिकार मिल गया के तुम कुछ भी करोगे? देश के भाग्य का निर्णय करने का अधिकार मिल गया? अगर अन्ना हजारे ये कहते हैं कि रीकॉल का अधिकार मिलना चाहिए कि बीच  में बुला लेना चाहिए जनप्रतिनिधियों को, तो देश चाहता है कि सारी कि सारी टीम अन्ना जो है वो बैरक में वापस चली जाए. “बैक तो पैवेलियन”. अन्ना जी जो  हैं वो चले जाएँ  रालेगन सिद्धि और वहां जा कर सिद्धि प्राप्त करें, साधना करें. बहुत  हो गया तमाशा. और ये प्रशांत भूषण को भी चाहिए कि वकालत करे. जो पैसा दे दे उसकी वकालत  करें . सबसे बड़ा भ्रष्टाचार तो ये ही है, कि ये जाने बिना न्याय का पक्ष है या नहीं है, आप किसी के भी पक्ष में. जो थैली ले कर के आ जाए जो अटैंची भर कर के ले आये तो आप खड़े हो जाते हैं. प्रशांत भूषण ने पूछा है कभी किसी से कि न्याय का पक्ष कौन सा है? जिसने पैसे दे दिया उसकी वकालत करने के लिए खड़े हो गए? ?? इस प्रकार के लोगों को देश के भाग्य का निर्णय करने का और मुह खोलने का और बकबक करने का क्या अधिकार है? तो इसलिए वापिस लौट जाएंग. पूरी कि पूरी टीम अन्ना –“बैक तो पैवेलियन”. देश चाहता है की-हो गया. बहुत तमाशा देख लिया, और देख लिया आपकी देशभक्ति का नमूना, और आगे जो गतिविधियाँ आप हिसार में दिखा रहे हैं, तो आप क्या करेंगे ये बता दिया आपने. हिसार में जिस बुद्धिमत्ता का प्रदर्शन आपने किया है. अक्लमंदी दिखाई है. प्रशांत भूषण को इतनी तमीज नहीं है? कि संसद की अगली बैठक होगी, अगला जो अधिवेशन होगा, उसके पहले कोई कानून नहीं बन सकता तो जो भ्रष्टाचार पचास साल में  साठ वर्ष में, तिरेसठ साल, में पैंसठ साल में नहीं दूर हुआ उसके लिए आप पैंसठ दिन इंतज़ार नहीं कर सकते? ??अभी कानून चाहिए? ये तो जो छोटे छोटे बच्चे होते हैं वे कहते हैं की अभी लाकर खिलौना दो नहीं तो मैं जमीन में लेटता हूँ. और बार बार अनशन की धमकी क्या देते हैं अन्ना? कि-“मैं तो फिर अनशन करूँगा”. करो अनशन. .. इस बार तुम्हारे अनशन की क्या गत बनती है. इसे अपनी आँखों से देखना . .. ये प्रशांत भूषण का जो वक्तव्य, जो बयान, जो हरकत है-“ये टीम अन्ना के ताबूत की कील है.” और सम्पूर्ण देशभक्तों का अपमान है और उन सीमा के प्रहरियों का अपमान है जो अपने परिवार की चिंता छोड़कर गए, अपनी नववधुओं की चिंता छोड़ कर के उनके सिन्दूर को अपने हाथों से पोंछ गए वो वीर . ये कितना बड़ा अपमान है ये? और कितनी “कम” प्रतिक्रिया हुई है. देशभक्त युवकों ने जा कर के, क्यूँकी उनसे सहन नहीं हुआ उन्होंने मारपीट करी.कर ली तो कर ली. छोटी छोटी बातों पर झगडे होते हैं. पान की दुकानों  पर झगडे होते हैं. ये वैसा झगडा नहीं है ना? ये देशभक्ति से प्रेरित हो कर अगर कुछ युवकों की उत्तेजना अगर प्रकट हुई है तो ये खतरे की घंटी है. कपिल सिब्बल  एंड कंपनी, दिग्विजय एंड कंपनी को लबर लबर करने वालों को सोचना चाहिए और सबसे बड़ा भ्रष्टाचार ये था कि माउन्टबेटन ब्रिटिश वायसराय कि पत्नी को प्रसन्न करने के लिए नेहरु ने पूरे के पूरे देश के टुकड़े करा दिए थे. इससे बड़ा भ्रष्टाचार संसार में  कभी नहीं हुआ.  और जो नेहरु कि विरासत के उत्तराधिकारी हैं उनको लबर लबर करने का कोइ अधिकार नहीं है.

प्रशांत भूषण कि पिटाई.

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